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होंठो से मुझे देखो

तेरी यादों को छुपा लूँ अपने ब्लॉग्स के ड्राफ़्ट में भेज दूँ अपनी तन्हाई तुझे,  भरकर खाकी लिफाफे में लोग जब अपने घरों को लौटने लगते हैं जब दोपहर के वक्त पसरने लगती है उदासी तब न जाने ये कैसे खयाल आते हैं कंप्युटर, प्रिंटर, मेज़ सड़क से उड़ती रेत से ढंक जाते हैं  जैसे बीते लम्हों की याद से बचना नामुमकिन हो पर एक दिन जब मिलेंगे हम किसी बस की आखिरी सीट पर  टकरा जाएंगे किसी किस्से के दिलचस्प से इक मोड़ पर तब तुम मुझे याद दिलाना कि तुम से कोई बात कहनी है जिसे सुनकर तुम आँखों से मुस्कराओ और होंठो से मुझे देखो।

हम जो चाहते हैं

ट्रैफिक में फंसी कार की तरह साँसे चलती हैं और ठहर जाती है। दिल धड़कता है फिर चुप हो जाता है। सुबह होती है। दिन ढ़ल जाता है। शाम दूर जाती किसी टैक्सी की तरह बुझती जाती है।  सड़क पर शोर बनते और बुझते हैं। बस की खिडकियों के शीशों से निकलती धुन एक सम्मोहन बाँधती हैं। मैं सड़क के किनारे बने तंबुओं को देखने लगता हूँ। एक कोई अधेड़ उम्र की महिला ईंटों का चूल्हा बनाकर रोटी सेंक रही है। अंदर बेड में कोई आदमी टीवी देखता लेटा हुआ है। वे बस में बैठे बैग लिए लोगों से कितने अलग हैं। उनके चेहरे पर कोई शिकायत नहीं है। जैसे कि वे जो चाहते थे उन्हें मिल गया हो। घर लौटने के इंतजार में घर आ जाता है। हम सड़क पर चलते हुए सोचते हैं कि किसी पुराने वक्त से टकरा जाएं। किसी से मिलने पर चाहने लगते हैं कि कुछ देर साथ ठहर कर बातें कर लें। और कभी किसी के साथ ठहरे हुए अचानक ऊब जाते हैं। असल में हम जो चाहते हैं वह हर पल घटित हो रहा है। हमने अपने ख्वाबों में जैसे जीवन के बीज बोए थे वे असल में खिल चुके हैं। जिस जीवन की हम कामना करते हैं असल में वह हमारे साथ ही चल रहा होता है। हम यह बात जानते भी हैं मग़र म...

बारिशें

कबूतर बैठ जाते हैं बिजली की तारों पर बच्चे दौड़ पड़ते हैं सड़कों पर छपाके मारते हुए बादल निकल पड़ते हैं शहर देखने  हवा की कमर में हाथ डाले और मैं बैठ जाता हूँ  अँगुलियों में कलम फंसाये और हाथों में डायरी लेकर।  कि सबका अपना अपना अंदाज़ होता है  बारिशों में भीगने का। 

फाटक

रेल्वे फाटक के सिग्नल की तरह दिल पता नहीं किसके इंतजार में खड़ा रहता है,  हसरतों की सड़क पर।  *** आजकल दिन चुपके से गुजर जाते हैं। शामें आहिस्ता से रात के पहलू में सिमट जाती हैं। मैं बस की पिछली सीट पर बैठा ये सोच रहा होता हूँ, कि हवा मेरे चेहरे पर लिखती जाती है कोई भीगा नग़मा। मैं आसमान में घर लौटते पंछियों से पूछता हूँ कि आज क्या जिया? कैसे पता करोगे कि ये दिन सिर्फ गुज़ारा भर है या जिया भी है? पेड़ से पत्ते गिरते हुए ठहर जाते हैं। पंछी चहक कर भूल जाते हैं अपनी चोंच बंद करना। ऑफिस की पास वाली गली में गुज़रते हुए मज़दूर फेंक देते हैं अपनी आधी बची सिगरेटों को। लड़कियां तोड़ देती हैं अपने बैग में छुपाया हुआ आईना। मैं ख़ुद से पूछता हूँ कि क्या बात है डियर, ये कैसे सवाल कर रहे हो? मन किसी डांट खाते बच्चे की तरह चुप खड़ा रहता है। दिल में कई हसरतें मुट्ठी से फिसलती रेत की तरह बिखर जाती हैं।  जब कोई जवाब नहीं मिलता तो मैं लिखने लगता हूँ ये छोटी छोटी बातें। एक झुंड पंछियों का शोर करता हुआ गुज़र जाता है शहर के ऊपर से। हसरतें। ख़्वाब। ज़िंदगी। शाम। तुम। 🤍 #poetry #ins...

प्रेम...

छत पर मूँगफली के छिलके बिखरे पड़े हैं उन्हीं के बीच पड़े हैं कुछ दाने ठुकराए हुए से  जैसे कोई जरूरी कामों के बीच  भूल गया हो प्रेम को। *** वह दोनों सड़क के किनारे शायद किसी बस के इंतजार में खड़े थे। लड़की ने अपने कंधे पर एक बड़ा सा डफल बैग टांग रखा था। लड़के के दोनों हाथ जीन्स की जेब में थे। उसने अपनी शर्ट के पॉकेट से लाइटर निकाला और एक सिगरेट जला ली। लड़की की आँखें हवा के हर झोंके के साथ धुएँ से भर जाती। लड़का उसकी तरफ़ देखता तो वह मुस्कुरा देती। प्रेम भी पता नहीं क्या चीज़ होती है। कोई कर के पछताता। कोई ना करके।  *** दिल बेधड़क सुर बुनता जाता है। ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से बीतती जाती है। दिन ऑफिस के कामों में कट जाता है। रात करवटें लेते गुजर जाती है। इसी बीच मुझे तुम्हें प्यार करना होता है। इन्हीं सब के बीच मैं तुम्हें याद करता हूँ। तुम्हारे लिए तोहफ़े सोचता हूँ, झुमके चुनता हूँ और पायलें लेता हूँ।  जरूरी नहीं कि जो दिन भर मैसेज न करता हो वह याद भी न करता हो।  समझा करो।  कि जिंदगी बिखरी हुई है और उसे बुहारने वाला लापता है। #Rohankidiary #poetry #...

सपने

हर हकीकत एक सपने से शुरू होती है। सपने तुम्हारी हसरतों के पौधे होते हैं। जब भी वक्त मिले उनसे पूरे मन से मिलो। उनके पास बैठो, उन्हें गले लगाओ। ख़ुद से पूछो कि इस ख्वाब को ताबीर करने के लिए तुम्हें क्या करना होगा? लाइफ का असली मकसद जवाब ढूँढना नहीं, बल्कि वे सवाल ढूँढना है जिनके जवाब तुम्हारे अंदर छिपे हुए हैं। चियर्स! 💫