Skip to main content

Posts

Showing posts with the label You

फ़िलहाल और कुछ नहीं चाहिए

  रात के एक बजे हैं। लगभग सारा शहर सो चुका है। मैं छत पर खड़ा अपने स्टिलनेस को पुकार रहा हूँ। मैं उससे पूछता हूँ कि क्या बदला है? वह इस रात की तरह खामोश है।  बादलों में से चाँद झाँकने लगता है।  मैं उससे कहता हूँ कि तुम रहो, दुनिया चलती रहे और मैं लिखता रहूँ कि मुझे फ़िलहाल कुछ और नहीं चाहिए।  तुम्हारी बात अलग है।