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Showing posts with the label माया-लोक

कभी-कभी

भरोसा नहीं होता कभी-कभी मुझे कि यह कविता मैंने लिखी है. कभी-कभी भरोसा नहीं होता कि इतवार की दोपहर में मेरे सीने पर तुम्हारे सिर की जगह किताब रखी हुई है. भरोसा नहीं होता कभी कभी कि सुबह हो गई है और मैं ज़िंदा हूँ. कभी कभी दिल करता है कि लिखूँ एक कविता सच्चे प्रेम के नाम पर, अब भरोसा नहीं होता.

एक करोड़ की बोतल

लिखने का ऐसा करिश्माई अंदाज मैंने आज तक न देखा. इस एक करोड़ की बोतल में वाक़ई बहुत गहरा नशा है. इस एक करोड़ की बोतल की कीमत इससे कहीं ज्यादा है. इस एक करोड़ की बोतल की कीमत तो अलादीन का जिन्न भी अदा नहीं कर सकता. ♥