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Showing posts from August, 2019

किसी के होने को....

कभी ये दो किताबें मेरी सबसे पसंदीदा किताबें हुआ करती थी. अब भी है मग़र इनमें अब पहले जैसी बात न रही. ऐसा अक्सर हमारे साथ अपने प्रिय जनों को लेकर भी होता है. पता नहीं क्यूँ. वह मेरे नीचे वाले फ्लोर पर रहती थी. जब भी वह मेरे कमरे में आती, ये दो किताबें ही उठाती. पता नहीं उस पाँच साल की बच्ची को इन किताबों में क्या दिखता कि वह इनमें इस कदर रमी रहती कि उसे ये किताबें थमाकर हम उसकी शैतानियों से बचकर अपना जरूरी काम कर लेते थे. आज भी जब इन किताबों पर नज़र जाती है तो कमरा उसकी मोहक हँसी और बेपरवाह शरारतों से भर उठता है. मैंने ये तस्वीर उसकी मम्मी को वॉट्‍सऐप पर भेजते हुए लिखा कि ये उसे दिखाना और कहना कि यह एक बहाना भर है यह कहने का कि कोई तुम्हें याद कर रहा है. कि कभी-कभी किसी के होने को उसके होने की जरूरत नहीं होती. 

एक करोड़ की बोतल

संदीप नैयर अच्छा लिखते हैं. मैंने अपने डिप्रेशन के दिनों में उनकी किताब डार्क नाइट पढ़ी थी. वह इस उम्र के हिसाब से मेरे लिए डिप्रेशन-बस्टर साबित हुई. मैंने उनकी यह किताब पढ़ कर उनसे कहा कि अगर ऐसी ही कुछ किताबें हो तो बताइए, आजकल डिप्रेशन में हूँ, शायद ऐसी किताबें पढ़ कर इससे जल्दी बाहर आ सकूँ. उन्होंने मेरी हालत को समझते हुए कहा कि किसी काम में मन लगाएँ और कुछ रचनात्मक अवश्य करें. उन्होंने यह दो किताबें सुझाई जो अब तक कि सबसे इंट्रेस्टिंग किताबें साबित हुई मेरे लिए. कुछ दिनों बाद में एक वायलिन समंदर किनारे पढ़कर यूँ ही उनके साथ हुई बातचीत को देखने लगा, मुझे कुछ अचानक याद आया.मैंने उनसे पूछा कि आपने उस दिन यह क्यूँ कहा था कि कुछ रचनात्मक अवश्य करना? उन्होंने कहा, "रचनात्मक से मेरा अर्थ था जिस में आपका मन लगे, जिसे करके आपको रचनात्मक सुख और संतोष मिले। इसमें प्रेम करने और प्रेम पाने जैसा सुख होता है। हर व्यक्ति जो मन और प्रकृति से प्रेमी होता है उसका कोई न कोई रचनात्मक पैशन अवश्य होता है। इसलिए औरतें भी ऐसे पुरुषों को अधिक पसंद करती हैं जिनका कोई रचनात्मक पैशन होता ह...

एक करोड़ की बोतल

लिखने का ऐसा करिश्माई अंदाज मैंने आज तक न देखा. इस एक करोड़ की बोतल में वाक़ई बहुत गहरा नशा है. इस एक करोड़ की बोतल की कीमत इससे कहीं ज्यादा है. इस एक करोड़ की बोतल की कीमत तो अलादीन का जिन्न भी अदा नहीं कर सकता. ♥

जावेद और साहिर का एक किस्सा

जावेद अख़्तर के दिन मुश्किल में गुज़र रहे थे । ऐसे में उन्होंने साहिर से मदद लेने का फैसला किया। फोन किया और वक़्त लेकर उनसे मुलाकात के लिए पहुंचे। उस दिन साहिर ने जावेद के चेहरे पर उदासी देखी और कहा, “आओ नौजवान, क्या हाल हैं, उदास हो?” जावेद ने बताया कि दिन मुश्किल चल रहे हैं, पैसे खत्म होने वाले हैं. उन्होंने साहिर से कहा कि अगर वो उन्हें कहीं काम दिला दें तो बहुत एहसान होगा। कुछ देर तक सोचते रहे साहिर उसी जाने-पहचाने अंदाज़ में बोले, “ज़रूर नौजवान, फ़कीर देखेगा क्या कर सकता है”। फिर पास रखी मेज़ की तरफ इशारा करके कहा, “हमने भी बुरे दिन देखें हैं नौजवान, फिलहाल ये ले लो, देखते हैं क्या हो सकता है”, जावेद अख़्तर ने देखा तो मेज़ पर दो सौ रुपए रखे हुए थे। वो चाहते तो पैसे मेरे हाथ पर भी रख सकते थे, लेकिन ये उस आदमी की सेंसिटिविटी थी कि उसे लगा कि कहीं मुझे बुरा न लग जाए। ये उस शख़्स का मयार था कि पैसे देते वक़्त भी वो मुझसे नज़र नहीं मिला रहा था। साहिर के साथ अब उनका उठना बैठना बढ़ गया था क्योंकि त्रिशूल, दीवार और काला पत्थर जैसी फिल्मों में कहानी सलीम-जावेद की थी तो...

शैतान की प्रेमिका! तुम याद आती हो

प्रेम में पड़ जाने को तो फ़िर दिल चाहता है लेकिन कोई कहाँ तुझ सा जो घर वालों से सौ गालियाँ खाए औऱ अगले दिन आकर दो सौ बार चूम जाए तुमसे इश्क़ क्या यूँ ही हो गया था! उफ्फ! शैतान की प्रेमिका! तुम याद आती हो.

कि खुशी ऑर्डर की जा सकती है

ख़ुश होने के लिए सही वक़्त का इंतजार नहीं करना होता. खुश रहना एक चोइस है. वह कभी भी ऑर्डर की जा सकती है. ♥ एक करोड़ की बोतल है... पीकर देखते हैं कैसी है. चियर्स! 🥃

दोस्ती के दिन के दिन

कभी कोई किताब खोल ली तो कभी खोलकर बस दो तीन पन्ने पढ़कर दूसरी उठा ली. कभी किसी को अधूरे खत लिखे तो कभी किसी को पूरे खत लिखकर भेजे और कुछ सोचते हुए डिलीट कर दिए. ये क्या हो रहा है कुछ समझ नहीं आ रहा. वे दिन अलग थे जब उस मायावी खूबसूरती लिए लड़की से मुझे प्रेम हो गया था. वह पहली नज़र में हो जाने वाला मेरा पहला प्रेम था. हालाँकि किसी खराब मौसम के चलते हम जुदा हो गए मगर जुदा होके भी वह मुझमें कहीं बाकी है. शायद मेरे लिखने या प्रेम करने के अंदाज में. पता नहीं. तुम सबको दोस्ती का दिन मुबारक हो. आप साथ रहें, मस्ती करें, धुएँ उड़ाए और प्रेम में पड़ जाएँ. फिर धोखे खाएँ और खुद के पास लौट आएँ और खुद से प्रेम करने लगें. ऐसी दुआ है. मैं आजकल सबसे अलग रहता हूँ. जब से वह मुझसे जुदा हुई है तबसे. मुझे सबकुछ बदला बदला लगता है शायद इसलिए क्यूँकि मैं उसकी माया में था या शायद अब माया में हूँ. वह रिएलिटी थी या ये दुनिया वास्तविक है पता नहीं. मुझे बस इतना पता है कि कोई आने को है जो एक्सट्रीमली ब्यूटीफुल है और जो प्रेम की अजानी परिभाषा है. मुझे नहीं पता वह कहाँ है लेकिन मुझे महसूस होता है कि ...