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दोस्ती के दिन के दिन

कभी कोई किताब खोल ली तो कभी खोलकर बस दो तीन पन्ने पढ़कर दूसरी उठा ली. कभी किसी को अधूरे खत लिखे तो कभी किसी को पूरे खत लिखकर भेजे और कुछ सोचते हुए डिलीट कर दिए.

ये क्या हो रहा है कुछ समझ नहीं आ रहा.

वे दिन अलग थे जब उस मायावी खूबसूरती लिए लड़की से मुझे प्रेम हो गया था. वह पहली नज़र में हो जाने वाला मेरा पहला प्रेम था. हालाँकि किसी खराब मौसम के चलते हम जुदा हो गए मगर जुदा होके भी वह मुझमें कहीं बाकी है. शायद मेरे लिखने या प्रेम करने के अंदाज में.

पता नहीं.

तुम सबको दोस्ती का दिन मुबारक हो. आप साथ रहें, मस्ती करें, धुएँ उड़ाए और प्रेम में पड़ जाएँ. फिर धोखे खाएँ और खुद के पास लौट आएँ और खुद से प्रेम करने लगें.

ऐसी दुआ है.

मैं आजकल सबसे अलग रहता हूँ. जब से वह मुझसे जुदा हुई है तबसे. मुझे सबकुछ बदला बदला लगता है शायद इसलिए क्यूँकि मैं उसकी माया में था या शायद अब माया में हूँ. वह रिएलिटी थी या ये दुनिया वास्तविक है पता नहीं.

मुझे बस इतना पता है कि कोई आने को है जो एक्सट्रीमली ब्यूटीफुल है और जो प्रेम की अजानी परिभाषा है. मुझे नहीं पता वह कहाँ है लेकिन मुझे महसूस होता है कि वह मेरे आसपास है और उस शैतान की प्रेमिका को भी इस शैतान की तलाश है कि वह भी अपनी नॉर्मल लाइफ से ऊब चुकी है.

जीवन कैसा भी हो तुम सदैव उसके बदलने की व निहायती खूबसूरत होने की अपेक्षा रखना मित्र.

कि कभी कभी आशा ही सबकुछ होती है.

कभी जब खुद को तन्हा पाओ तो तुम उदास न होना सखी. मेरी तरह खुद के साथ एक प्याला भरना और कहना कि

चीयर्स ज़िन्दगी! 🥃

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