वह हर सुबह अनाउंस करती है कि चारों के चारों निकम्मे हो सोते ही रहते हो। उठो..! वर्ना सबको एक एक पड़ेगी। चारों में पापा भी शामिल होते हैं। उठ के चाय पीने के बाद हमें हर रोज़ पहली बार मालूम होता है कि हम इस धरती के सबसे गंदे जीव हैं क्यूँकि हमने अभी तक नहाया नहीं है। हम पापा से पूछते हैं कि मम्मी की डांट से कैसे बचें? पापा कहते हैं कि मैं ख़ुद इतने सालों से बचने का तरीका खोज रहा हूँ। मिलते ही बता दूँगा। कभी कभी लगता है कि हम चारों के जीवन का मकसद सिर्फ मम्मी से बचने के तरीके ढूँढना है। बाकि सरे काम तो साइड में यूँ ही होते रहते हैं। उसके बीमार होने पर जब हम दो भाई घर के काम करते हुए आपस में लड़ने लगते हैं की ये काम मैंने किया था अब ये वाला तू करेगा तो वह बीमारी भूल के हम दोनों को सलीके से याद दिलाती है कि दोनों सच में नालायक हो। हम मुस्कुराते हैं कि वह अपने नॉर्मल अवतार में आ गई है। इन दिनों के सूनेपन में उसकी यह डांट ही हमें यह आभास दिलाती रहती है की दुनिया अब भी अपनी रफ़्तार से चल रही है। ♥️ दुनिया यूँ ही चलती रहे। वह हमेशा हमें डाँटती रहे। हैप्पी मदर्स डे। लव यू मॉम। *** नोबिता की म...