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दिलफरोश

तस्वीरें तिरी हर शाम मैं सीने से लगा रखती हूँ। खिड़की के पास बैठी तेरी राह तकती हूँ । किस शहर में है वो किस हाल में रहता है। हर गुज़रते झोंके से ये सवाल किया करती हूँ। तू यूँ अलविदा कहे बिना। न जाने कहाँ चला गया मुझसे मेरा हाल पूछे बिना। खिड़कियाँ, दरवाज़े, मेहराबें पूछती है मुझसे कि आँखों का काजल क्यूँ ज़ाया करती हूँ?। मैं उन्हें क्या जवाब दूँ, ए दिलफरोश!?!