Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2021

तुम अपना ख्याल रखना

 हम जिस सिचुऐशन में होते हैं उसे ऑब्जर्व करना तो सरल है मगर लिखना कितना मुश्किल है न।  मैं सोचता हूँ कि होता तो कितना अच्छा होता कि मेरे पास मेरा एक क्लोन होता। मैं सोचता जाता और वह मेरे कमरे में बैठा हर बात को लैपटॉप पे लिखता जाता। पर मैं हर हालात को लिखना क्यूँ चाहता हूँ? क्या मैं लिखने का एडिक्ट हूँ?  यहाँ चारों तरफ़ मरीजों की भीड़ है। कोई रिसेप्शन पे अपने साथ आए मरीज़ का नाम बता रहा है तो कोई पूछ रहा है कि ये मेडिसन कौन से फ्लोर पर मिलेगी? मैं एक दीवार के सहारे खड़ा ये सब लिख रहा हूँ। क्यूँ लिख रहा हूँ ये मुझे भी नहीं पता। अचानक एक तेज और सुरीली आवाज़ आती है। वह ओपीडी के डॉक्टर के कक्ष के बाहर खड़ी किसी पैशेंट का नाम पुकार रही है। वह तीन चार बार आवाज़ लगाती है मगर उसे कोई रेस्पोंस नहीं मिलता। उसकी गहरी और तीखी आँखों पर फ्रस्ट्रेशन की लकीर उभरते लगती है। वह परेशान होकर और जोर से चिल्लाना चाहती है मगर एक बार चारों तरफ़ नजरें घुमाकर तुरंत अगली पर्ची का नाम पुकारने लगती है। शायद उसे आभास हुआ हो कि कोई उसे देख रहा हो और वह इस एक्स्प्रेशन अच्छी नहीं लग रही हो। शायद।  म...