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Showing posts with the label प्रेम

नियति

खिड़की से हवा का एक झोंका आता। डेस्क पर रेत पसरती जाती। किताबों के पन्ने कुछ पल कांपते और ठहर जाते। जैसे कोई थका हुआ मजदूर गहरी नींद से अचानक उठ गया हो और फिर से सो गया हो। काम करते अचानक जब ऊब होने लगती तो आँखें कौने कौने को ऑब्जर्व करने लगती। ऊपर लगी खिड़की से आती रोशनी की परछाई में एक मकड़ी ने जाल बुना है। एक मकोड़ा कुछ देर उस जाल में फंसा छटपटाता है और फिर आहिस्ता आहिस्ता दम तोड़ देता है। जैसा कि एक रोज़ लालच से उपजे प्रेम का हाल होता है। मैं अपने कैबिन से बाहर आ जाता हूँ। टहलते हुए अचानक उलझन में खो जाता हूँ कि मकोड़े के हाल पर आश्चर्य किया जाए या दुःखी हुआ जाए। ऐसा सोचते मैं अचानक एक मकोड़े में बदल जाता हूँ और धूल भरी सड़क पर रेंगने लगता हूँ। चलते हुए अचानक पाता हूँ कि आगे किसी ने जाल बिछाया हुआ है। मैं कुछ पल को ठहर जाता हूँ। अचानक ख्याल आता है कि सबकी अपनी नियति होती है कि जिसे जहाँ जाना होता है वह उसी तरफ़ जाता है।  हो सकता है कि उसके जाल में फंसना ही मेरी नियति हो। दूर से चमकती उसकी आँखें रेगिस्तान में पानी के भ्रम के जैसी थी। मैं अपने हाल पर मुस्कराता हूँ और ...

तुम बताओ?

एक मुसाफिर जानता है  कि उसे कहाँ ठहरना है और कहाँ से कब चले जाना है एक टैक्सी वाले को मालूम है  कि किस मोड़ से इस शहर के बाहर जाकर भरा जा सकता है गिलास एक गिलहरी को भी इल्म है  कि पेड़ से गिरे बीज को कैसे कुतरना है पेड़ का पत्ता पत्ता जानता है  कि कब शाख से बिछड़ कर मिट्टी में मिल जाना है पंछी दिनभर काम करके  घर लौट कर करते हैं  अपनी चोंच साफ़  बादल अपनी आदत से मज़बूर  रोज बरसता है शहर पर,  थोड़ा थोड़ा  कि सब को मालूम है  अपने अपने ज़रूरी कामों के बारे में।  तुम बताओ,  तुम प्रेम के बारे में क्या जानते हो?

सफ़ेद फूल के प्रिंट वाली कुर्ती

एक आहट फिर शाम की एक नग़मा फिर उसके नाम का कि जो कुछ भी है बस इतना ही है मेरे पास।  *** उस नीली अँगुलियों वाली लड़की के पास एक पिट्ठू बैग था। उसमें एक छोटा आईना और लिपस्टिक के साथ कुछ रंग भरे थे। अगले स्टेशन पर वह उतरने को खड़ी हुई तो एक हल्के धक्के से उसके बैग में रखे रंग बिखर गए।  उन रंगों के आपस में मिलने से आसमाँ के केनवास पर ये शाम खिल आई।  कभी मिलने के लिए तड़पते। कभी तड़प कर मिलते। तो कभी मिलकर फिर से मिलने के लिए। दिल को एक ढब चैन न आता। दिन बीतते गए। शामें किसी लंबी मेट्रो रेल की तरह शहर के ऊपर से गुज़रती रही। ज़िंदगी का कारवाँ चलता रहा।  हमने डीटीसी बसों में प्रेम किया। मेट्रो में बाहें डाले खड़े रहे। सड़क पर विदेशी जोड़ों की तरह रुक रुक कर कौने तलाशते रहे। हर पेड़, हर गली, हर मोड़ और हर वीकेंड को हमने अपने भीगे होठों से रंग दिया।  हम इश्क़ में शहर हो गए। हमने इस कदर इश्क़ किया। पर एक शहर भी किसी मोड़ पर ख़ुद से जुदा हो जाता है। जैसे बदरपुर बॉर्डर। जैसे मैं और तुम।  इन दिनों मेरे शहर में चाहतों का मौसम खिला है। दिल में बुझी हुई राख सुल...

एक अच्छा आदमी और एक अच्छी माँ

लड़का बीमार है। लड़की उसके माथे पर हाथ रख रख कर देखती है कि कितना बुखार है। लड़का खांसता है। लड़की पीठ पर हाथ फेरते हुए कहती है कि फ़िकर मत करना, एक दो दिन में बिलकुल पहले जैसे हो जाओगे। लड़के को उल्टियां होती है। लड़की बार बार वाशबेसिन साफ़ करती है। लड़का कहता है कुछ खाने का मन नहीं है। लड़की कहती है जो भी खाना हो बना दूँगी, बस थोड़ा सा खा लेना। लड़का कहता है दवाइयाँ शायद असरदार नहीं है। लड़की लाल मिर्च और झाड़ू से नजर उतार देती है।  इसी बीच पड़ोसी के एक दो लोग आकर कहते हैं कि ज्यादा पास मत जाया करो, ये बीमारी अच्छी नहीं है। लक्षण बुरे हैं कुछ भी हो सकता है। लड़की हाँ ह्म्म अच्छा कहती जाती है और उनके जाते ही लड़के के हाथ धोती है और उसे खाना देती है। इसी बीच लड़की बच्चों के लिए खाना बनाती है। इसी बीच लड़का सोचता है कि इस बार राशन का बिल कैसे भरा जाए। इसे लिखते हुए एक लड़का सीखता है कि पत्नी क्या होती है। इसे पढ़ते हुए एक लड़की सीखती है कि घर क्या होता है।  मैं सोचता हूँ कि बच्चों की परवरिश और पढ़ाई के बीच इन्हें कब आखिरी बार अपने लिए वक्त मिल पाया होगा? कब इन्होंन...

कभी-कभी

भरोसा नहीं होता कभी-कभी मुझे कि यह कविता मैंने लिखी है. कभी-कभी भरोसा नहीं होता कि इतवार की दोपहर में मेरे सीने पर तुम्हारे सिर की जगह किताब रखी हुई है. भरोसा नहीं होता कभी कभी कि सुबह हो गई है और मैं ज़िंदा हूँ. कभी कभी दिल करता है कि लिखूँ एक कविता सच्चे प्रेम के नाम पर, अब भरोसा नहीं होता.

एक करोड़ की बोतल

लिखने का ऐसा करिश्माई अंदाज मैंने आज तक न देखा. इस एक करोड़ की बोतल में वाक़ई बहुत गहरा नशा है. इस एक करोड़ की बोतल की कीमत इससे कहीं ज्यादा है. इस एक करोड़ की बोतल की कीमत तो अलादीन का जिन्न भी अदा नहीं कर सकता. ♥