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एक अच्छा आदमी और एक अच्छी माँ



लड़का बीमार है। लड़की उसके माथे पर हाथ रख रख कर देखती है कि कितना बुखार है। लड़का खांसता है। लड़की पीठ पर हाथ फेरते हुए कहती है कि फ़िकर मत करना, एक दो दिन में बिलकुल पहले जैसे हो जाओगे। लड़के को उल्टियां होती है। लड़की बार बार वाशबेसिन साफ़ करती है। लड़का कहता है कुछ खाने का मन नहीं है। लड़की कहती है जो भी खाना हो बना दूँगी, बस थोड़ा सा खा लेना। लड़का कहता है दवाइयाँ शायद असरदार नहीं है। लड़की लाल मिर्च और झाड़ू से नजर उतार देती है। 

इसी बीच पड़ोसी के एक दो लोग आकर कहते हैं कि ज्यादा पास मत जाया करो, ये बीमारी अच्छी नहीं है। लक्षण बुरे हैं कुछ भी हो सकता है। लड़की हाँ ह्म्म अच्छा कहती जाती है और उनके जाते ही लड़के के हाथ धोती है और उसे खाना देती है। इसी बीच लड़की बच्चों के लिए खाना बनाती है। इसी बीच लड़का सोचता है कि इस बार राशन का बिल कैसे भरा जाए।

इसे लिखते हुए एक लड़का सीखता है कि पत्नी क्या होती है। इसे पढ़ते हुए एक लड़की सीखती है कि घर क्या होता है। 

मैं सोचता हूँ कि बच्चों की परवरिश और पढ़ाई के बीच इन्हें कब आखिरी बार अपने लिए वक्त मिल पाया होगा? कब इन्होंने साथ साथ अपने पसंद की कोई मूवी देखी होगी? ऐसे कितने ही लम्हे आए और गुजर गए होंगे जिसमें दोनों ने हताशा से हाथ थामे सोचा होगा कि सब कुछ छोड़कर कहीं दूर चलते हैं। पर वे रुके रहे। जीवन चलता गया। हम बड़े होते गए और वे बूढ़े होते गए।

अपने माता पिता को बूढे होते हुए देखना सबसे बड़ा दुख है। इससे भी बड़ा दुख है कि हम कुछ कर भी नहीं सकते। लेकिन हम सीख सकते हैं इनसे एक अच्छा आदमी होना एक अच्छी माँ होना। 

लव यू मम्मी पापा। 

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हो सकता है

 मौसम विभाग ने कहा था की दस तारिख को बारिश होगी  उसने कहा था की दस तारीख को मिलेंगे  न बारिश हुई न वह मिलने आई।  हो सकता है इन दो बातों का एक दूजे से कोई लेना देना न हो। 

जैसे...

वॉयलिन की कोई उदास धुन बजाते हुए, जैसे मर गया हो कोई संगीतकार। जैसे कोई बूढ़ा ठहर गया हो अपनी आखिरी खुराक खाने से पहले ही। जैसे मुस्कराते हुए हिरन की गर्दन काट दी हो शिकारी ने और वह भूल गया हो आखिरी तड़प के दर्द को चेहरे पर लाना।  जैसे पुकारा हो तुमने मेरा नाम आखिरी बार जैसे मैं कर रहा हूँ इंतजार तुमसे मिलने का,  आखिरी बार।

ख़यालों के कुछ टुकड़े

एक मजदूर प्रेमी अपने महीने भर की तनख्वाह से अपनी महबूबा के लिए एक चाँद लाया. और महबूबा चाँद पर बैठकर किसी शहजादे के पास चली गई. *** किताबें इंसान को बिना पिए ही शराबी बना देती है। *** कभी कभी मैं महसूस करता हूँ कि मैं सर्द हवा का एक झोंका हूँ. जो हर सुबह एक नीली तितली की पीठ पर बैठकर अपने काम पर जाता है. और शाम को लौटता है एक बादल बनकर. *** ऑफिस का घर से दूर होना कितना मजेदार है! 2 घंटे की भीड़ भरी तन्हाई में कितना कुछ लिखा जा सकता है। *** इस दुनिया में हर चीज एक करिश्मा है. यह करिश्मा ही है कि मैं ऑफिस में कीबोर्ड पर टिक टिक करते वक़्त यह महसूस करता हूँ कि मैं अपनी अपनी प्रेमिका को ख़त लिख रहा हूँ. ख़त, जो हर शाम अधूरा रह जाता है. ***