एक मजदूर प्रेमी अपने महीने भर की तनख्वाह से अपनी महबूबा के लिए एक चाँद लाया.
और महबूबा चाँद पर बैठकर किसी शहजादे के पास चली गई.
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किताबें इंसान को बिना पिए ही शराबी बना देती है।
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कभी कभी मैं महसूस करता हूँ कि मैं सर्द हवा का एक झोंका हूँ.
जो हर सुबह एक नीली तितली की पीठ पर बैठकर अपने काम पर जाता है.
और शाम को लौटता है एक बादल बनकर.
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ऑफिस का घर से दूर होना कितना मजेदार है! 2 घंटे की भीड़ भरी तन्हाई में कितना कुछ लिखा जा सकता है।
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इस दुनिया में हर चीज एक करिश्मा है. यह करिश्मा ही है कि मैं ऑफिस में कीबोर्ड पर टिक टिक करते वक़्त यह महसूस करता हूँ कि मैं अपनी अपनी प्रेमिका को ख़त लिख रहा हूँ. ख़त, जो हर शाम अधूरा रह जाता है.
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