मैं इस दुनिया से बेफिकर, तुम्हारे और मेरे प्रेम के बारे में लिखने वाला आदमी हूँ। मैं सोचता हूँ कि दो प्रेम करते पंछियों के जरिए तुम्हारी और मेरी बातें लिखता ही रहूँ मग़र इन दिनों ऐसा कुछ करने का मन नहीं है। हाथ लिखने को उठते हैं मग़र आजकल दिल में ज़ज्बात नहीं है। ये कोई कम बुरी बात नहीं है। क्या हुआ है?