संदीप नैयर अच्छा लिखते हैं. मैंने अपने डिप्रेशन के दिनों में उनकी किताब डार्क नाइट पढ़ी थी. वह इस उम्र के हिसाब से मेरे लिए डिप्रेशन-बस्टर साबित हुई. मैंने उनकी यह किताब पढ़ कर उनसे कहा कि अगर ऐसी ही कुछ किताबें हो तो बताइए, आजकल डिप्रेशन में हूँ, शायद ऐसी किताबें पढ़ कर इससे जल्दी बाहर आ सकूँ.
उन्होंने मेरी हालत को समझते हुए कहा कि किसी काम में मन लगाएँ और कुछ रचनात्मक अवश्य करें. उन्होंने यह दो किताबें सुझाई जो अब तक कि सबसे इंट्रेस्टिंग किताबें साबित हुई मेरे लिए.
कुछ दिनों बाद में एक वायलिन समंदर किनारे पढ़कर यूँ ही उनके साथ हुई बातचीत को देखने लगा, मुझे कुछ अचानक याद आया.मैंने उनसे पूछा कि आपने उस दिन यह क्यूँ कहा था कि कुछ रचनात्मक अवश्य करना?
उन्होंने कहा, "रचनात्मक से मेरा अर्थ था जिस में आपका मन लगे, जिसे करके आपको रचनात्मक सुख और संतोष मिले।
इसमें प्रेम करने और प्रेम पाने जैसा सुख होता है। हर व्यक्ति जो मन और प्रकृति से प्रेमी होता है उसका कोई न कोई रचनात्मक पैशन अवश्य होता है। इसलिए औरतें भी ऐसे पुरुषों को अधिक पसंद करती हैं जिनका कोई रचनात्मक पैशन होता है क्योंकि वे जानती हैं कि ऐसा व्यक्ति अपनी प्रकृति से प्रेमी होता है।"
यह उस वक़्त तो मेरी समझ नहीं आया मग़र आज वाकई महसूस हुआ कि अपनी मन और कला के अनुरूप कुछ रचनात्मक करना वाक़ई एक प्रेमिका की बाहों में होने का सुख देता है. जब मैं किताब पढ़ते वक़्त या कुछ लिखते वक़्त उसके ख़यालों में गुम हुआ होता हूँ तो उसकी नर्म-गरम साँसों का स्पर्श मेरी गर्दन के आसपास कहीं महसूस होने लगता है, उस वक़्त यकीन आता है कि साँसों की भी उँगलियाँ होती है.
कला कभी न मरने वाला प्रेम है. वह हमें हमेशा जवां रखती है.
शुक्रिया ज़िन्दगी. चियर्स!

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