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प्रेम...


छत पर मूँगफली के छिलके बिखरे पड़े हैं
उन्हीं के बीच पड़े हैं कुछ दाने ठुकराए हुए से 

जैसे कोई जरूरी कामों के बीच 
भूल गया हो प्रेम को।

***

वह दोनों सड़क के किनारे शायद किसी बस के इंतजार में खड़े थे। लड़की ने अपने कंधे पर एक बड़ा सा डफल बैग टांग रखा था। लड़के के दोनों हाथ जीन्स की जेब में थे। उसने अपनी शर्ट के पॉकेट से लाइटर निकाला और एक सिगरेट जला ली। लड़की की आँखें हवा के हर झोंके के साथ धुएँ से भर जाती। लड़का उसकी तरफ़ देखता तो वह मुस्कुरा देती।

प्रेम भी पता नहीं क्या चीज़ होती है। कोई कर के पछताता। कोई ना करके। 

***

दिल बेधड़क सुर बुनता जाता है। ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से बीतती जाती है। दिन ऑफिस के कामों में कट जाता है। रात करवटें लेते गुजर जाती है। इसी बीच मुझे तुम्हें प्यार करना होता है। इन्हीं सब के बीच मैं तुम्हें याद करता हूँ। तुम्हारे लिए तोहफ़े सोचता हूँ, झुमके चुनता हूँ और पायलें लेता हूँ। 

जरूरी नहीं कि जो दिन भर मैसेज न करता हो वह याद भी न करता हो। 

समझा करो। 

कि जिंदगी बिखरी हुई है और उसे बुहारने वाला लापता है।

#Rohankidiary #poetry #love #selfmusing 

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