मेरे नए दोस्त मेरे घर आए। उन्होंने कहा कि तुम कुछ नहीं कर सकोगे क्यूँकि तुम थोड़े अलग हो। आर्टिस्ट का यहाँ कोई फ्यूचर नहीं होता। मैं यह सुनकर घबरा गया। मुझे पसीना आने लगा। अगले ही दिन से मैंने नौकरी ढूँढनी शुरू कर दी। एक सप्ताह बाद मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब करने लगा। मैं ख़ुश था। इस बात पर नहीं कि मुझे नौकरी मिल गई, इस बात के लिए कि वे लोग कोई नौकरी नहीं कर रहे थे पर मैं अब कर रहा था। मुझे लगा वे लोग उदास होंगे। मैं उन्हें देखने उनमें से एक के घर गया। मैं चौंक गया कि वे सारे लोग एक साथ बैठे थे और कुछ बातें कर रहे थे। मुझे लगा शायद अपना अपना दुःख बांट रहे हैं आपस में। मग़र नहीं। वे लोग मनाली जाने का प्लान बना रहे थे। उन्होंने मुझे देखते हुए कहा कि सॉरी यार, हम तुम्हें ले चलना चाहते हैं पर अब तो तुम जॉब करने लगे हो तो तुम तो जा नहीं पाओगे। और वे हँसने लगे। मुझे लगा मेरे साथ धोखा हुआ है। मैं झेंप गया। मैंने बनावटी मुस्कान बिखरते हुए कहा कि अरे नहीं, मैं वैसे भी नहीं जाना चाहता, मुझे पसंद नहीं ये घूमना वूमना। वे लोग फ़िर हँसने लगे। ज़ोर ज़ोर से। मु...