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मैं भूल जाना चाहता हूँ




 ब्लू जीन्स और ओलिव ग्रीन टी शर्ट पहने हुए, हाथ में किताब लिए और बेख़याली की आँखों में झांकते हुए मैं भूल जाना चाहता हूँ, सब कुछ। 

मैं भूल जाना चाहता हूँ अपने वॉलेट में रखी उसकी तस्वीर को, कल रात से चुप तांकते उसके खतों को, गुजर चुकी उस शाम को, उसकी छत को छूकर आती इस हवा को।

सब कुछ। 

खुद को भी। 

तुम को भी। 

सब कुछ।

[ पेंटिंग - आर्ट यू। Art you ]

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जैसे...

वॉयलिन की कोई उदास धुन बजाते हुए, जैसे मर गया हो कोई संगीतकार। जैसे कोई बूढ़ा ठहर गया हो अपनी आखिरी खुराक खाने से पहले ही। जैसे मुस्कराते हुए हिरन की गर्दन काट दी हो शिकारी ने और वह भूल गया हो आखिरी तड़प के दर्द को चेहरे पर लाना।  जैसे पुकारा हो तुमने मेरा नाम आखिरी बार जैसे मैं कर रहा हूँ इंतजार तुमसे मिलने का,  आखिरी बार।

हो सकता है

 मौसम विभाग ने कहा था की दस तारिख को बारिश होगी  उसने कहा था की दस तारीख को मिलेंगे  न बारिश हुई न वह मिलने आई।  हो सकता है इन दो बातों का एक दूजे से कोई लेना देना न हो। 

ख़यालों के कुछ टुकड़े

एक मजदूर प्रेमी अपने महीने भर की तनख्वाह से अपनी महबूबा के लिए एक चाँद लाया. और महबूबा चाँद पर बैठकर किसी शहजादे के पास चली गई. *** किताबें इंसान को बिना पिए ही शराबी बना देती है। *** कभी कभी मैं महसूस करता हूँ कि मैं सर्द हवा का एक झोंका हूँ. जो हर सुबह एक नीली तितली की पीठ पर बैठकर अपने काम पर जाता है. और शाम को लौटता है एक बादल बनकर. *** ऑफिस का घर से दूर होना कितना मजेदार है! 2 घंटे की भीड़ भरी तन्हाई में कितना कुछ लिखा जा सकता है। *** इस दुनिया में हर चीज एक करिश्मा है. यह करिश्मा ही है कि मैं ऑफिस में कीबोर्ड पर टिक टिक करते वक़्त यह महसूस करता हूँ कि मैं अपनी अपनी प्रेमिका को ख़त लिख रहा हूँ. ख़त, जो हर शाम अधूरा रह जाता है. ***