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मेरा लिखना क्या है?


क्या होता अगर मैं उन बातों को लिख पाता. वे बातें जो तुम्हारे मेरे बीच कभी हुई नहीं. क्या होता ग़र हम कुछ दिनों और साथ रहते. क्या होता अगर हम कुछ देर और सेंट्रल पार्क में हाथ थामे टहलते और चूमने के लिए कोई कोना तलाशते. क्या होता अगर...

पता नहीं क्या होता.

एक कहानी लिखने के बारे में सोचना मुझे रोमांच से भर देता है. कैसे एक बीज में छुपा होता है एक पेड़? कैसे बूँद बूँद बारिश में छुपा होता है समंदर? कभी सोचा है तुमने? मैंने सोचा. इसलिए शब्दों से उगा ली कई सारी कहानियाँ.

इन दिनों मैं हॉस्पिटल के चक्कर काट रहा हूँ. तरह-तरह के मरीजों को देखकर आभास होता है कि वक्त तेज़ी से बढ़ता जा रहा है मग़र जिंदगी ठहर सी गई है. एक तेज चुभन मेरी रीढ़ की हड्डी से होकर गुजर जाती है. हो सकता है तुम इसे मेरा कमीनापन कहो मग़र मुझे इसमें भी एक कहानी दिखाई देने लगती है. मैं खुद को इसी हॉस्पिटल के किसी बिस्तर पर दीवार का सहारा लिए बैठे देखता हूँ. मैं किस बीमारी के चलते यहाँ आया मुझे मालूम नहीं मग़र मैं इतना स्वस्थ हो चुका हूँ कि मेरे हाथ में मेरा लैपटॉप है और दिमाग़ में कई सारी कहानियाँ. 

मैं अक्सर सोचने लगता हूँ कि हम सब किसी कहानी के कैरेक्टर्स हैं. सब अपना अपना रोल अदा करते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. हो सकता है तुमने भी कभी ऑफिस के कीबोर्ड में उँगलियाँ फंसाये ऐसा सोचा हो. 

मैंने ये भी सोचा है अक्सर, कि तुम और मैं एक कहानी में इतनी रात गए जाग रहे हैं. मैं तुम्हें मिलने के लिए मना रहा हूँ और तुम मुझसे बचने की जुगत में लगी हो. आखिर में मैं जीत जाता हूँ और तुम 'ओह नो' वाली स्माइली भेजते हुए कहती हो ओके.

ये कहानी कौन लिख रहा है? ये दुनिया क्या चीज़ है? ये जिंदगी क्या शै है?

तुम कौन हो मैं कौन हूँ? ये मेरा इतनी रात को लिखना क्या है? और तुम्हारा इसे पढ़ना क्या है? 

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हो सकता है

 मौसम विभाग ने कहा था की दस तारिख को बारिश होगी  उसने कहा था की दस तारीख को मिलेंगे  न बारिश हुई न वह मिलने आई।  हो सकता है इन दो बातों का एक दूजे से कोई लेना देना न हो। 

जैसे...

वॉयलिन की कोई उदास धुन बजाते हुए, जैसे मर गया हो कोई संगीतकार। जैसे कोई बूढ़ा ठहर गया हो अपनी आखिरी खुराक खाने से पहले ही। जैसे मुस्कराते हुए हिरन की गर्दन काट दी हो शिकारी ने और वह भूल गया हो आखिरी तड़प के दर्द को चेहरे पर लाना।  जैसे पुकारा हो तुमने मेरा नाम आखिरी बार जैसे मैं कर रहा हूँ इंतजार तुमसे मिलने का,  आखिरी बार।

ख़यालों के कुछ टुकड़े

एक मजदूर प्रेमी अपने महीने भर की तनख्वाह से अपनी महबूबा के लिए एक चाँद लाया. और महबूबा चाँद पर बैठकर किसी शहजादे के पास चली गई. *** किताबें इंसान को बिना पिए ही शराबी बना देती है। *** कभी कभी मैं महसूस करता हूँ कि मैं सर्द हवा का एक झोंका हूँ. जो हर सुबह एक नीली तितली की पीठ पर बैठकर अपने काम पर जाता है. और शाम को लौटता है एक बादल बनकर. *** ऑफिस का घर से दूर होना कितना मजेदार है! 2 घंटे की भीड़ भरी तन्हाई में कितना कुछ लिखा जा सकता है। *** इस दुनिया में हर चीज एक करिश्मा है. यह करिश्मा ही है कि मैं ऑफिस में कीबोर्ड पर टिक टिक करते वक़्त यह महसूस करता हूँ कि मैं अपनी अपनी प्रेमिका को ख़त लिख रहा हूँ. ख़त, जो हर शाम अधूरा रह जाता है. ***