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हम जैसे हैं वैसे


कभी कभी हम काम, दौलत, नाम, शोहरत के पीछे अंधाधुंध दौड़ते जाते हैं। लालच वासना और हवस को प्रेम समझकर बाइक के पीछे दौड़ रहे कुत्ते की तरह भागते हैं। 

किसी रोज़ अचानक मुँह पर एक लात पड़ती है। तो बैठकर सोचते हैं कि ये क्या कर रहे थे? 

मुझे बचपन से ही साफ़ सुनने में प्रॉब्लम रही है। एक बात को सुनने के लिए मैं सामने वाले को दो से तीन बार कहने को मजबूर करता हूँ। हालाँकि कभी कभी महसूस होता है कि ये प्रॉब्लम से ज्यादा मेरी आदत बन चुकी है। संजय जी ने कहा कि मशीन लगा लो। धीरे धीरे आदत पड़ जाएगी तो उसका असर दिखना स्टार्ट हो जाएगा। मशीन मेरे पास सालों से पड़ी थी मग़र मैं लगाने से डरता था दोस्त हंसेंगे। कि लोग देखेंगे तो क्या क्या उपहास करेंगे। 

मशीन लगाने के कुछ दिनों तक मैं बैचैन रहा। लगता रहा जैसे मुझसे मैं छूट रहा हूँ। कई बार मैंने बीच बीच में लगाना छोड़ भी दिया। मग़र ऑफिस में संजय जी को देखता तो फ़िर लगा लेता। उनके डर से मैंने 1 साल की मशीन की बैट्री ऑर्डर कर दी। 

मशीन ने कुछ कुछ काम करना शुरू किया है। मैं बहुत झीनी और महीन आवाजें महसूस करने लगा हूँ। जैसे पंखे की हल्की सरसराहट। ऑफिस के प्रिंटर के पन्नों की सरसराहट। पीछे कौने में हो रही घुसुर- पुसुर। 

क्यूँकि ये आवाजें मेरे लिए नई हैं इसलिए इनके मेल से मेरे मस्तिष्क में एक अनचिन्हा म्युज़िक बनने लगता है। मैं कई बार उसके असर में हल्का हल्का मुस्कराता रहता हूँ। दोस्त पूछते हैं, "क्या बाबु भैया, लड़की का चक्कर है क्या?" उसके बाद में और ज्यादा मुस्कराता। 

अब मैं ख़ुद से बहस नहीं करता। ख़ुद से लड़ता नहीं हूँ। एक आवाज़ कहती है कि मशीन मत लगाओ। दूसरी कहती है कि संजय जी अभी आते ही होंगे। मैं दोनों को झगड़ता हुआ छोड़ देता हूँ। और ख़ुद बाहर सड़क से आती बाइक के ब्रेक, साइकिल के चैन की खचर-पचर सुनने लगता हूँ। 

कभी कभी जो नहीं हो पाता है। उसे भूलकर जो हो रहा है। उसी में खो जाना चाहिए।

लव यू जिंदगी। ❤️

***

ऊपर वाले दो पैराग्राफ में कही बात अचानक दिमाग में कौंधी। शायद मैं भी कहीं भागे जा रहा था। अब लात पड़ी तो अक्ल आई है। इसे पढ़ने वाले लोग ये बात पहले ही समझ जाएं इसलिए लिख दी।

और कम सुनने वाली बात इसलिए कि कहीं कोई ऐसा इस पोस्ट को पढ़ रहा हो जो किसी वजह से ख़ुद को इम्परफेक्ट समझता हो तो उसे हिम्मत मिले और वह खुद को अपना सके। 

हमें कोई हम जैसे हैं वैसे एक्सेप्ट करे, इससे पहले जरूरी है कि हम खुद को जैसे हैं वैसे प्रेम करें। 

मैरी क्रिसमस। ❤️❤️

#Rohankidiary #poetry #positivity #inspire #christmas #yourself #selfmusing 

Pic - via Facebook 

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हो सकता है

 मौसम विभाग ने कहा था की दस तारिख को बारिश होगी  उसने कहा था की दस तारीख को मिलेंगे  न बारिश हुई न वह मिलने आई।  हो सकता है इन दो बातों का एक दूजे से कोई लेना देना न हो। 

जैसे...

वॉयलिन की कोई उदास धुन बजाते हुए, जैसे मर गया हो कोई संगीतकार। जैसे कोई बूढ़ा ठहर गया हो अपनी आखिरी खुराक खाने से पहले ही। जैसे मुस्कराते हुए हिरन की गर्दन काट दी हो शिकारी ने और वह भूल गया हो आखिरी तड़प के दर्द को चेहरे पर लाना।  जैसे पुकारा हो तुमने मेरा नाम आखिरी बार जैसे मैं कर रहा हूँ इंतजार तुमसे मिलने का,  आखिरी बार।

ख़यालों के कुछ टुकड़े

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