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एक रफ़ूगर

उसके बालों की किनारी पर कुछ सफ़ेद बाल आ चुके थे। उसके चेहरे पर सिलवटें उसकी ज़िन्दगी की व्यस्तताएं बयां कर रही थी। 

वह एक नजर नीचे रखे डॉक्युमेंट्स को देखती फ़िर मेरे सामने एक सवाल रख देती। मैं लैपटॉप में लिखता जाता अपने हुनर का सबूत।

ओके। मैं तुम्हें दो दिन बाद कॉल करुँगी। उसने लैपटॉप बंद करते हुए कहा।

मैं एक कॉफी लेकर ऑफिस से बाहर निकल आया। हवा में बारिश के बाद की हल्की नमी घुली थी। जैसे उसकी आँखों में घुला था एक स्याह खालीपन।

सड़क के किनारे इंतजार में खड़े चाय और सिगरेट के स्टॉल्स के आगे, ऑफिस के बाद मिले दोस्त बचे हुए दिन को धुएँ में उड़ा रहे थे।

हवा के झोंकों पर चढ़ते हुए ऊपर उठता हुआ धुआं बादलों की शकल में आसमाँ पर छा गया। उफ़क़ पर नीम अँधेरा छाने लगा। शाम पेड़ों से होते हुए सड़क पर उतर आई। 

बस स्टैंड से कुछ दूरी पर एक रफ़ूगर बैठा हुआ था। उसने एक गत्ते पर लाल स्कैच से लिख रखा था कि यहां पुराने कपड़े रफ़ू किए जाते हैं। काश कोई दुकान होती जहाँ हम बीते दिनों को तरतीब में लाकर ज़िन्दगी रफ़ू कर लेते। कितना कुछ उधड़ा पड़ा है। 

मग़र... 

सड़क पर चलते हुए इक मोड़ पर अपराजिता के फ़ूलों से टकरा गया। एक भीनी खुशबु गले से उतर कर साँसों में समा गई। काश कभी टकरा जाएं हम भी यूँ, चलते चलते किसी मोड़ पर।  
                          *****
यह तस्वीर उस लड़की ने ली है जिसकी आँखें और चेहरा हमेशा खिला रहता है मग़र बाल हमेशा बिखरे रहते हैं। जैसे बिखरे हुए हैं इस तस्वीर में बादल। ❤️

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जैसे...

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वे दिन....

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