उसके पीछे खड़ी दीवार पर एक लड़का और एक लड़की पेंटिंग में से झांक रहे थे। लड़की के बालों का रंग लाल था। लड़के की शर्ट का रंग नेवी ब्लू था। उसके हाथ में एक गिटार था। उसके बालों की लटें उसकी आँखों पर पहरा कर रही थी। उसने एक सफ़ेद काले रंग की शर्ट पहनी हुई थी। अचानक मुझे लगा जैसे उसने मुझे ये लिखते हुए देख लिया हो। पीछे से आवाज़ आई, दोस्त वह तुम्हें ही देख रही है। मैंने उसके पास जाकर साथ कॉफ़ी पर चलने को पूछा। उसने कहा एक शर्त पर। क्या तुम मेरी एक ऐसी तस्वीर उतार सकते हो जैसा तुमने मुझे इसमें लिखा है?
मौसम विभाग ने कहा था की दस तारिख को बारिश होगी उसने कहा था की दस तारीख को मिलेंगे न बारिश हुई न वह मिलने आई। हो सकता है इन दो बातों का एक दूजे से कोई लेना देना न हो।
वॉयलिन की कोई उदास धुन बजाते हुए, जैसे मर गया हो कोई संगीतकार। जैसे कोई बूढ़ा ठहर गया हो अपनी आखिरी खुराक खाने से पहले ही। जैसे मुस्कराते हुए हिरन की गर्दन काट दी हो शिकारी ने और वह भूल गया हो आखिरी तड़प के दर्द को चेहरे पर लाना। जैसे पुकारा हो तुमने मेरा नाम आखिरी बार जैसे मैं कर रहा हूँ इंतजार तुमसे मिलने का, आखिरी बार।
मैं अक्सर काम के सिलसिले में उसके घर की गली से गुजरता हूँ तो ख्याल आता है कि कहीं वह एक दफ़ा दिख जाए तो दिल को चैन आए. मगर वह तो ऐसे ग़ायब है कि कहीं कोई इशारा नहीं मिलता. चाहत है कि उससे मुलाकातों का सिलसिला फ़िर से शुरू हो. भले ही वह कुछ बोले न पर मेरे साथ मुझसे सटकर तो बैठे. जैसे कभी बैठे थे हम राजीव चौक के सेंट्रल पार्क में. एक दूजे में खोए मगर इक-दूजे से ही बे-ख़बर. वे दिन.... ♥
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