किसी को ऑफिस में छुप कर देखते जाना
और उसके देखते ही पानी की बोतल ढूँढने लगना
बीच सड़क पर किसी की कमर में हाथ डाल देना
किसी को भरी मार्किट में बेपरवाह चूम लेना
किसी का हाथ खींचकर दिसम्बर की इक रात में
अपने ऊपर ओढ़ लेना
भरी गर्मी की दोपहर में किसी की गर्दन पर रखी बूँदों को पी लेना
किसी को सितारों भरी रात में छत पर बिछा लेना।
ये सब उतना ही रोमांचक है
जितना कि इन लम्हों को लिख लेना।
कि लिखना बीते और आने वाले लम्हों को फ़िर से जी लेना है।
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